स्वामी नीलकंठ महराज की धरोहर बचाना है,अरबों की संपत्ति को बचना है तो ट्रस्ट को अपने आधीन करे मध्यप्रदेश सरकार :- नारायण त्रिपाठी

स्वामी नीलकंठ महराज की धरोहर बचाना है,अरबों की संपत्ति को बचना है तो ट्रस्ट को अपने आधीन करे मध्यप्रदेश सरकार :- नारायण त्रिपाठी
हम किसी पर कोई आरोप नहीं लगाते लेकिन जिस षडयंत्र की बू वर्तमान समय में इस आश्रम से आती है वह इस धार्मिक स्थल के लिए ठीक नहीं। जब आग लगती है तो धुंआ निकलता है और उस धुएं से जिस तरह की बाते निकलकर सामने आ रही है वह साफ संकेत देती है कि अगर मध्यप्रदेश सरकार और उसके मुखिया मोहन यादव इस मामले के गंभीरता से विचार नहीं करते तो आश्रम की अरबों की संपत्ति खुर्दबुर्द हो जाएगी। अगर आश्रम की संपत्ति खुर्दबुर्द होगी तो उन दान दाताओं को भी पीड़ा होगी जिन्होंने आश्रम के लिए तमाम तरह की परिसंपत्तियां दान की थी। आज आश्रम में अरबों की सम्पत्ति है इसे अगर सरकार अपने अधिनस्त नहीं करती तो इसे किसी निजी हाथों में सौंपा जायेगा तो जमीनों में बड़ा खेल हो जायेगा,अगर ये संपत्तियां शासन के अधीन हो जाएगी तो कम से कम सुरक्षित रहेगी। आश्रम युगों युगों तक चलता रहेगा। स्वामी नीलकंठ को मानने वाले उन पर आस्था रखने वाले हर व्यक्ति को इस मामले में मुखरता से सामने आना चाहिए और सरकार तक ये बाते पहुंचाई जानी चाहिए कि इसे सुरक्षित और संरक्षित किया जाय। इसकी देख रेख के लिए पुजारी और समिति बनाई जाय लेकिन संपत्तियों को बेचने खरीदने का अधिकार इनके पास न हो यह कार्य केवल और केवल सरकार की निगरानी में हो।
मैं इस धार्मिक नगरी का निवासी होने के नाते लोगों द्वारा स्वामी नीलकंठ महराज जी के बारे में बताई बातों को शिरोधार्य करके आप सभी धार्मिक क्षेत्र वासियों से मैहर वासियों से कहना चाहूंगा कि सभी लोग यह पुण्य का कार्य है स्वामी नीलकंठ महराज के आश्रम की बात है उनके परिसंपत्तियों को सुरक्षित और संरक्षित करने की बात है इसलिए मुखरता के साथ सामने आइए और इस मामले में आवाज बुलंद कर इतनी जोर से चिल्लाइए कि प्रदेश सरकार के मुखिया मोहन यादव के कानों तक अपने जनहित की आवाज पहुंचे और इसे सरकार अपने आधीन कर ले।
इस आश्रम और इसकी परिसंपत्तियों की रक्षा करना उसे सुरक्षित और संरक्षित करना हर मैहर वासी का कर्तव्य है। साथ ही जिले में बैठे हर जिम्मेवार अधिकारी जिसे इस पवित्र रज में काम करने का अवसर मिला आश्रम के हितों को देखते हुए बिना किसी दबाव के राज्य सरकार से आश्रम को सरकार के अधीन लिए जाने की मांग की जानी चाहिए।

