दिनांक 07 अगस्त 2026 शुक्रवार को फेसबुक पेज पर प्रतियोगिता आयोजित हो रही है।

कार्यालय अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर मध्यप्रदेश
प्रिय साहित्य प्रेमियों,
मैं विनय पाण्डेय /विषय प्रदाता अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल, जबलपुर की ओर से आपको सूचित करता हूं कि हमारा साप्ताहिक साहित्यिक प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आपको अपनी रचनाएँ फेसबुक ग्रुप कमेंट बॉक्स में पोस्ट करनी होंगी।
अलग से पोस्ट की गई रचना अमान्य होगी।प्रतियोगिता का विषय “हरियाली भी तिरंगी है”
है और आप अपनी रचनाएँ किसी भी विधा में लिख सकते हैं।प्रतियोगिता की शर्तें:
– केवल कुटुम्ब ऐप सदस्यता वाले सदस्य ही इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।
– रचना में नाम के नीचे कुटुम्ब ऐप संख्या लिखना अनिवार्य है।
– रचनाएँ केवल फेसबुक ग्रुप कमेंट बॉक्स में ही पोस्ट की जानी चाहिए तभी मान्य होगी अलग से पोस्ट रचना मान्य नहीं होगी।
– प्रतियोगिता की समय सीमा 07 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक है।सम्मान पत्र: सभी प्रतिभागियों को सम्मान पत्र प्रदान किए जाएंगे, जिन्हें वे फेसबुक पर स्वयं डाउनलोड कर सकते हैं।
फेसबुक ग्रुप का लिंक: [फेसबुक ग्रुप का लिंक]
नोट: व्हाट्सएप समूह में इस प्रतियोगिता के संबंध में किसी भी प्रकार की वार्ता स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी जानकारी और अपडेट्स फेसबुक ग्रुप पर ही उपलब्ध होंगी।
केवल फेसबुक पेज पर पोस्ट रचना प्रतियोगिता में शामिल की जायेगी।
तो आइए, अपनी कलम उठाइए और इस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी साहित्यिक प्रतिभा का प्रदर्शन कीजिए!सादर,
विनय पाण्डेय
संस्थापक
अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल, जबलपुर मध्यप्रदेश


अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर समूह 3
फेसबुक प्रतियोगिता
विषय- हरियाली भी तिरंगी है
शीर्षक- तिरंगे के रंग,सावन के संग
हरियाली भी तिरंगी है,यह केवल खेतों की शान नहीं,
बसता इसमें भारत का गौरव,यह धरती की पहचान सही।
सावन की रिमझिम फुहारों में,जब तीज उमंगें लाती है,
झूले,मेंहदी,लोक-गीतों संग,संस्कृति मुस्काती जाती है।
उधर गगन में तिरंगा लहराए,आज़ादी का संदेश लिए,
इधर धरा हरियाली ओढ़े,नवजीवन का परिवेश लिए।
हरित रंग खेतों की हरियाली,श्रम-समृद्धि का गान बने,
श्वेत रंग शांति-अहिंसा का,मानवता की पहचान बने।
केसरिया त्याग-साहस का,हर जन के मन में वास रहे,
भारत माँ के गौरव हित,जीवन का हर श्वास रहे।
सावन का उत्सव कहे सदा प्रकृति का करना मान,
स्वाधीनता का पर्व सिखाए,राष्ट्र का पहले हो सम्मान।
जब तीज की पेंगें ऊँची हों,मन नभ से बातें करता है,
तब सीमा पर प्रहरी सैनिक,अपना धर्म निभाता है।
एक ओर गूँजे ढोलक की थाप,एक ओर रण का जयगान,
दोनों में भारत धड़क रहा,दोनों में बसता हिंदुस्तान।
आओ ऐसा प्रण आज करें,हरियाली का मान बढ़ाएँ,
वृक्ष लगाकर,देश सँवारकर,आने वाला कल महकाएँ।
हर आँगन में तीज खिले,हर दिल में राष्ट्र-प्रेम जगे,
हरियाली भी तिरंगी है,यह भाव सदा मन में जगे।
धरती,संस्कृति,राष्ट्र व प्रकृति,चारों का अभिनंदन हो,
भारत माँ के चरणों में,जीवन का हर स्पंदन हो।
मंजूषा दुग्गल
शिक्षिका/ कवयित्री/ लेखिका
करनाल (हरियाणा)