वह ख़बर क्या थी

वह ख़बर क्या थी
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गाँव में शोर था, गलियों में हलचल अपार थी,
हर चेहरे पर जाने कैसी बेचैनी सवार थी,
हवा भी आज कुछ कहने को बेकरार थी—
मगर किसी ने न पूछा, वह ख़बर क्या थी?
किसी के द्वार पर सन्नाटा पहरा दे रहा था,
कोई भीतर ही भीतर आँसू पी रहा था,
किसी का मौन जाने क्या-क्या कह रहा था—
मगर किसी ने न जाना, वह ख़बर क्या थी?
कहीं रिश्ते अचानक मौन हो गए थे,
कहीं अपने ही अपने से दूर हो गए थे,
कहीं सपने आँखों में चूर हो गए थे—
मगर किसी ने न पूछा, वह ख़बर क्या थी?
किसी माँ की आँखों में प्रतीक्षा ठहरी थी,
किसी पिता की साँसों में पीड़ा गहरी थी,
किसी बहन की राखी अब भी वहीं ठहरी थी—
मगर किसी ने न पूछा, वह ख़बर क्या थी?
समय बीतता गया, चेहरे बदलते गए,
कुछ प्रश्न दब गए, कुछ रिश्ते ढलते गए,
जिसे दुनिया ने कहा खबर,
पर किसी के लिए पूरी ज़िंदगी थी।…. ✍️
पूनम कुमारी ( शिक्षिका)
स्नातकोत्तर हिंदी
मधुबनी बिहार

