उजली राह

 

उजली राह

सत्य मनुज का अनमोल धन, चरित्र को दृढ़ बनाता है।
झूठ भले क्षणिक सुख दे, अंतर्मन को भरमाता है।

सत्य कठिन पथ है फिर भी, पग इससे मत डिगने दो।
आँधी आए, धूप पड़े तो, दीप सत्य का जलने दो।।

सत्य-वचन में शक्ति अनोखी, विश्वासों को जीत सके।
निर्भय होकर कर्म करे जो, जग में अपना मान रखे।

देर भले परिणाम मिले पर, फल इसका स्थायी है।
निर्मल मन की शांति मिले तो, सबसे बड़ी कमाई है।।

बाधाएँ पथ में आएँगी, धैर्य कभी मत खोना तुम,
ईमानदारी साथ रहे तो, ऊँचा रखना अपना सिर तुम।

सत्य और अहिंसा लेकर, गांधी ने राह दिखाई थी,
अंधियारे के बीच उन्होंने, आशा-ज्योति जलाई थी।।

सत्य समाज में प्रेम जगाता, विश्वासों को सींचे है।
सद्भावों की निर्मल गंगा, जन-मन में फिर खींचे है।

कर्मों में जब सत्य समाया, भय का कोई काम नहीं,
असत्य भले कुछ पल चमके, उसकी कोई शाम नहीं।।

सत्य कठिन है, फिर भी इसकी राह सदा उजियारी है।
मान-सम्मान और आत्मगौरव, इसकी ही फुलवारी है।

जीवन चाहे राह कठिन हो, सत्य कभी मत छोड़ो तुम,
सत्य अंततः जीत सुनिश्चित—इस विश्वास से बढ़ो तुम।।

स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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