शीर्षक; शिव समान नहीं कोई दुजा
सुन लो भक्तों कर लो पूजा
शिव सामान नहीं कोई दुजा
प्रेम किया सती ने शिव को पाया
पहला पहला प़ैम विवाह रचाया
सबने रोका सबने टोका किसी
ने भी समझ नही पाया सती ने किसको पूजा
है ये शिवशंकर महाप़लयंकर कोई समझ नहीं पाया
बसाकर तीन लोक की बस्ती
श्मशान को घर बनाया
है वो महादानी भरते हैं सबकी
खाली झोली स्वयं के लिए कौड़ी न बचाया
ऐसे महाप्रभु को भला कौन समझ पाया है
कहते हैं न
धन धन भोलेनाथ तेरी कौड़ी
नहीं खजाने में
तीन लोक की बस्ती बसाए
आप रहे वीराने में
लोकहित के कारण विष पी लिये चुपचाप
कंठ में रोक नील कंठ कहलाए
जहर पिया है जहर उगला नहीं
ऐसे मेरा भोला है
पिता का नाम ब्रम्हा बताया है
दादा श्रीविष्णु है पुरोहित ने कहा
पर दादा भी बता दीजिए
फिर सती के साथ सात फेरे लीजिए
शंभू बोले सुन महराज !
मै ही पिता मैं ही दादा और परदादा हूं न मेरा जन्म है न मृत्यु मैं स्वयम्भु हूं
जन्म जन्म से सती की ही पति हूं सती की ही पति हूं

गौरी शर्मा आंशु
धमतरी छ ग

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