तुम साथ हो तो… ❤️

 

तुम साथ हो तो… ❤️

तुम साथ हो तो
रास्ते चाहे कितने भी कठिन हों,
कदमों में थकान नहीं रहती,
क्योंकि कोई पीछे से कहता है—
“चलो, मैं हूँ ना…”

तुम साथ हो तो
घर सिर्फ दीवारों का नाम नहीं रहता,
एक-दूसरे की खामोशी भी
बिन कहे समझ आने लगती है।

कभी मैं टूटूँ,
तो तुम मुझे समेट लेना,
कभी तुम थक जाओ,
तो मैं तुम्हारा सहारा बन जाऊँ—
यही तो है साथ निभाना।

न हर दिन एक जैसा होगा,
न हर बात पर सहमति होगी,
मगर रूठने के बाद भी
एक-दूसरे तक लौट आने का
वादा बना रहे…

तुम साथ हो तो
जिंदगी बहुत आसान नहीं,
बस बहुत अपनी-सी लगती है।

और शायद प्रेम यही है—
हाथ पकड़कर उम्र भर चलना नहीं,
बल्कि जब कोई रास्ते में गिरने लगे,
तो उसका हाथ छोड़ने के बजाय
और कसकर थाम लेना।

सरोज प्रसाद राय

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